*अपने हाथ से हुए "पुण्य"* *और**किसी दूसरे से हुए "पाप"**की चर्चा किसी से न करें !!!**यह आपके चरित्र की "परीक्षा" है!* Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps August 15, 2020 Read more
*कमाई की परिभाषा सिर्फ धन से ही तय नहीं होती,* *तजुर्बा, रिश्ते, प्रेम, सम्मान और सबक,**सब कमाई के ही रूप हैं।* Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps July 04, 2020 Read more
*भक्ति और भाव में बहने वाले आसूं इस बात का प्रतीक है के श्री कृष्णा ने आपको छू लिया है....* *जय श्री राधे कृष्णा* Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps July 01, 2020 Read more
*कृष्ण स्वर्ग, कृष्ण मोक्ष, कृष्ण परम साध्य है !**कृष्ण जीव, कृष्ण ब्रह्म, कृष्ण ही आराध्य है.*🙏🏻🌹🙏🏻 Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps June 29, 2020 Read more
*जिसके मन की कड़ी मुझसे जुड़ जाती है,उसे धन की लालसा नहीं रहती,उसे केवल मेरे दर्शनों की प्यास रहती है* *जय श्री कृष्ण* Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps May 10, 2020 Read more
*नज़र से दूर रख कर भी मुझ पर नज़र रखते हो,**आखिर बात क्या है जो इतनी खबर रखते हो..!!**हरे कृष्णा* Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps May 02, 2020 Read more
*यह पानी... के बुलबुलों... जैसा जीवन... रोज बदलता जाता है... यहां कुछ भी छुपा... नहीं है... तो जब बुढ़ापा... आएगा... और उसके पहले... कदम... तुम सुनोगे... दुख होगा... कि हार गया...**हारे... इत्यादि कुछ भी नहीं... जीत की आकांक्षा... के कारण हार... का खयाल... पैदा हो रहा है... यह भ्रांति... इसलिए बन रही है... क्योंकि तुम जवान... रहना चाहते थे... और प्रकृति... किसी चीज... को ठहरने नहीं देती... प्रकृति बहाव है... और तुमने प्रकृति... के विपरीत... कुछ चाहा था... जो संभव... नहीं है... संभव नहीं... हो सकता है... न हुआ है... और न कभी होगा... जो संभव... नहीं हो सकता... उसकी आकांक्षा... में दुख है...**फिर तुम बुड्ढे... हो जाओगे... तब भी नहीं समझोगे... अब तुम मरना... नहीं चाहते... पहले जवानी...पकड़ी थी... अब बुढ़ापे... को पकड़ते हो... तो कुछ सीखे नहीं... देखा कि बचपन था... वह भी गया... जवानी थी... वह भी गयी... बुढ़ापा भी जाएगा... जीवन भी जाएगा... मौत भी आएगी... और जब जीवन... ही चला गया... तो मौत... भी जाएगी... घबराओ मत... सब बह रहा है... यहां न जीवन... रुकता है... न मौत... रुकती है...**इस प्रवाह... को जो सहज... भाव से स्वीकार... कर लेता है... जो रत्तीभर... भी इससे संघर्ष... नहीं करता... जो कहता है... जो हो... मैं उससे...राजी हूँ... जैसा हो... उससे मैं राजी हूँ... कभी धन हो... तो धन... से राजी हूँ... और कभी दरिद्रता... आ जाए... तो दरिद्रता... से राजी हूँ... कभी महल... मिल जायें... तो महल... में रह लूँगा... कभी महल... खो जाएं... तो उनके लिए रोता... नहीं रहूंगा... लौटकर पीछे... देखूंगा नहीं... जो होगा... जैसा होगा... उससे अन्यथा... मेरे भीतर कोई.. कामना न करूंगा...**फिर कैसा दुख ?... फिर दुख... असंभव है... *राधे राधे* Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps April 30, 2020 Read more