आपकी अपनी आँखों के आंसू भीआपके अपने नहीं हैंफिर और क्या अपना हो सकता है।जिसको आप अपना कहते हैं चाहे जो हो, वह भी अपना नहीं है।एक परमात्मा और आपके अपने के अतिरिक्त आपका अपना कुछ नहीं है।स्वयं के अतिरिक्त कोई सम्पत्ति नहीं है।इसलिये जिसने भी अपना जीवनस्वयं की खोज में लगाया है,उसने ही सार की खोज में लगाया है।और जो स्वयं को छोड़ कर कुछ भी खोज रहा हैवह चाहे संसार की सारी सम्पदा पा लेआखिर खाली हाथ ही रहेगा।
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