*जय श्री कृष्णा*तुम खुशबू की तरह हो तुम्हें पकड़ तो नहीं सकता पर भाव में तो रख सकता हूं तेरी खुशबू ही है जो बंया होती है ,,,भाव महक जाते हैं जब तू मन को बंसी बनाता है दिल के आंगन में प्रेम खिल जाते हैं जब तू भाव में उतर आता है एक सुकून है एक ऐसा एहसास जो है मेरे पास *प्यारे* जब तेरी चर्चा तुझसे ही करते हैं
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