क्या आश्चर्यनही होता तुम्हे ? कि इतने बड़े विराट ब्रह्मांड में तुम्हारे जैसाकोई दूसरा नही है,,,,,पहले भी कभी नही थाऔर नआगे कभी होगा। इससे बड़ा प्रमाणक्याहो सकता हैईश्वर का ????? और ये भीसत्य है किजब कोईरचनाकारकोई रचनाकरता है तोउसमें अपनाअंश जरूरछोड़ देता है !!!!!इसलिएईश्वर ने जोतुम्हारीरचना की हैउसमें भीअपना अंशजरूर छोड़ा है !!!!!और वोदिखाई देता हैतुम्हारे प्रेम,संवेदनशीलताऔर करुणा के रूप मे ।
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