प्रेम एक अद्वैत अनुभूति है... देह से परे और नेह से जुड़े,अभिन्न मन तन की परस्पर,ससम्मानीय सी स्वीकृति है...होता इसकी अभिव्यक्ति का न,कोई भी दिन कभी विशेष है ।न हीअपने प्रिय से प्रेम प्रकट ..करने का मोहताज़ सन्देश है।स्वार्थ की संकीर्णता से है मुक्त..प्रिय जन की शुभेच्छा से युक्त
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