*जिसके मन की कड़ी मुझसे जुड़ जाती है,उसे धन की लालसा नहीं रहती,उसे केवल मेरे दर्शनों की प्यास रहती है* *जय श्री कृष्ण* Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps May 10, 2020 Read more
*नज़र से दूर रख कर भी मुझ पर नज़र रखते हो,**आखिर बात क्या है जो इतनी खबर रखते हो..!!**हरे कृष्णा* Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps May 02, 2020 Read more
*यह पानी... के बुलबुलों... जैसा जीवन... रोज बदलता जाता है... यहां कुछ भी छुपा... नहीं है... तो जब बुढ़ापा... आएगा... और उसके पहले... कदम... तुम सुनोगे... दुख होगा... कि हार गया...**हारे... इत्यादि कुछ भी नहीं... जीत की आकांक्षा... के कारण हार... का खयाल... पैदा हो रहा है... यह भ्रांति... इसलिए बन रही है... क्योंकि तुम जवान... रहना चाहते थे... और प्रकृति... किसी चीज... को ठहरने नहीं देती... प्रकृति बहाव है... और तुमने प्रकृति... के विपरीत... कुछ चाहा था... जो संभव... नहीं है... संभव नहीं... हो सकता है... न हुआ है... और न कभी होगा... जो संभव... नहीं हो सकता... उसकी आकांक्षा... में दुख है...**फिर तुम बुड्ढे... हो जाओगे... तब भी नहीं समझोगे... अब तुम मरना... नहीं चाहते... पहले जवानी...पकड़ी थी... अब बुढ़ापे... को पकड़ते हो... तो कुछ सीखे नहीं... देखा कि बचपन था... वह भी गया... जवानी थी... वह भी गयी... बुढ़ापा भी जाएगा... जीवन भी जाएगा... मौत भी आएगी... और जब जीवन... ही चला गया... तो मौत... भी जाएगी... घबराओ मत... सब बह रहा है... यहां न जीवन... रुकता है... न मौत... रुकती है...**इस प्रवाह... को जो सहज... भाव से स्वीकार... कर लेता है... जो रत्तीभर... भी इससे संघर्ष... नहीं करता... जो कहता है... जो हो... मैं उससे...राजी हूँ... जैसा हो... उससे मैं राजी हूँ... कभी धन हो... तो धन... से राजी हूँ... और कभी दरिद्रता... आ जाए... तो दरिद्रता... से राजी हूँ... कभी महल... मिल जायें... तो महल... में रह लूँगा... कभी महल... खो जाएं... तो उनके लिए रोता... नहीं रहूंगा... लौटकर पीछे... देखूंगा नहीं... जो होगा... जैसा होगा... उससे अन्यथा... मेरे भीतर कोई.. कामना न करूंगा...**फिर कैसा दुख ?... फिर दुख... असंभव है... *राधे राधे* Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps April 30, 2020 Read more
*एक बार भगवान राम और लक्ष्मण एक सरोवर में स्नान के लिए उतरे। उतरते समय उन्होंने अपने-अपने धनुष बाहर तट पर गाड़ दिए जब वे स्नान करके बाहर निकले तो लक्ष्मण ने देखा की उनकी धनुष की नोक पर रक्त लगा हुआ था! उन्होंने भगवान राम से कहा -" भ्राता ! लगता है कि अनजाने में कोई हिंसा हो गई ।" दोनों ने मिट्टी हटाकर देखा तो पता चला कि वहां एक मेढ़क मरणासन्न पड़ा है भगवान राम ने करुणावश मेंढक से कहा- "तुमने आवाज क्यों नहीं दी ? कुछ हलचल, छटपटाहट तो करनी थी। हम लोग तुम्हें बचा लेते जब सांप पकड़ता है तब तुम खूब आवाज लगाते हो। धनुष लगा तो क्यों नहीं बोले ?मेंढक बोला - प्रभु! जब सांप पकड़ता है तब मैं 'राम- राम' चिल्लाता हूं एक आशा और विश्वास रहता है, प्रभु अवश्य पुकार सुनेंगे। पर आज देखा कि साक्षात भगवान श्री राम स्वयं धनुष लगा रहे है तो किसे पुकारता? आपके सिवा किसी का नाम याद नहीं आया बस इसे अपना सौभाग्य मानकर चुपचाप सहता रहा।"कहानी का सार- *सच्चे भक्त जीवन के हर क्षण को भगवान का आशीर्वाद मानकर उसे स्वीकार करते हैं सुख और दुःख प्रभु की ही कृपा और कोप का परिणाम ही तो हैं।* 🙏*जय श्री राम*🙏 Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps April 29, 2020 Read more
*मैं रास्ते से गुज़र रहा था कि, सामने से एक परिचित मिल गए., उन्होंने मुझसे कहा “मज़े” में हो, मैंने जवाब दिया “आनंद” में हूँ..,* *तो उन्होंने कहा मज़े और आनंद में क्या फ़र्क़ है..? मुझे परिचित को बताना पड़ा कि, ”मज़े” के लिए पैसा चाहिए, और”आनंद” के लिए परिवार और मित्र चाहिए..!!* Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps April 26, 2020 Read more
*हरे कृष्णा*।। *जीवन का हर फैसला भगवान पर छोड़ दो। वह आपकी हर समय रक्षा करेगा। ईश्वर के सामने अपनी इच्छाएं रखो, इन इच्छाओं के लिए समय तय मत करो। जो जीवन में घटेगा उस पर प्रश्न मत खड़े करो, बल्कि प्रभु पर अटूट विश्वास रखो, फिर देखना प्रभु आपको गोद से नहीं उतारेंगे*।*भक्ति में हमारा विश्वास कमजोर नहीं होना चाहिए। सुख-दुख*, *संकट में हमेशा प्रभु को याद करों। बाकी सब प्रभुजी ठीक करेंगें* ।*जय श्री राधे राधे* Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps April 26, 2020 Read more
जिनके अनन्त रूप हैं जिनका कभी क्षय नहीं होता, कभी अधोगति नहीं होती कृष्णः 'कृष्' सत्तावाचक है | 'ण' आनन्दवाचक है | इन दोनों के एकत्व का सूचक परब्रह्म कृष्ण कहलाता है |केशवः क माने ब्रह्म को और ईश – शिव को वश में रखने वाले |केशिनिषूदनः घोड़े का आकार वाले केशि नामक दैत्य का नाश करने वाले |,कमल के पत्ते जैसी सुन्दर विशाल आँखों वाले |जगत्पतिः जगत के पति |जगन्निवासः जिनमें जगत का निवास मम् ह्दय के पास Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps April 26, 2020 Read more