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परमात्मा का नाम ही त्रिताप अर्थात अधिदैविक, अधि भौतिक आध्यात्मिक दु:खों को दूर कर सकता है। केवल उस परमात्मा का नाम स्मरण करना चाहिए जो समस्त संसार का पालनहार है। जिसका नाम वेदों, पुराणों और श्रुति एवं स्मृतियों ने सर्वश्रेष्ठ बताया है। नाम सुमिरन तीन प्रकार से होता है। वाणी से, जिह्वा से और सबसे उत्तम मन का सिमरण होता है। परमात्मा के नाम का स्मरण एक जहाज है जिसमें बैठकर श्रद्धालु साधक भव सागर से पार हो जाता है।

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विश्वास का यह अर्थ नहीं जो मैं चाहता हूँ वही भगवान करेंगे,विश्वास का अर्थ है कृष्ण वो ही करेंगे जो मेरे लिए सही होगा...!

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मत सोच इतना... जिन्दगी के बारे में जिसने जिन्दगी दी है... उसने भी तो कुछ सोचा होगा।

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अगर कोई आपसे उम्मीद करता है,तो ये उसकी मजबूरी नहीं, आपके साथ लगाव और विश्वास है.

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प्रयास छोटा ही सही लेकिन लगातार होना चाहिए....बारिश की बूंदे भले ही छोटी हो लेकिन उनका लगातार बरसना, बड़ी नदी का बहाव बन जाता है..।ऐसे ही हमारे छोटे छोटे प्रयास निश्चित ही जिंदगी में बड़ा परिवर्तन लाने में बड़ी सार्थक भूमिका निभाते है।

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समझदार वो नही होता जो... हर बात का जवाब दे सकता है... समझदार वो होता है जिसे... ये समझ होती है कि क्या बोलना है और... क्या नही बोलना है ।

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चाबी से खुला ताला बार बार काम मे आता है, और हथौड़े से खुलने पर दुबारा काम का नही रहता, इसी तरह संबंधों के ताले को क्रोध के हथौड़े से नहीं, बल्कि प्रेम की चाबी से खोलें |

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