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भाव महक गये जरा मुरली धुन सुनाओ प्रभु दिल के आँगन में फूल खिल जायें जरा स्वर सजाओ तो भाव के गगन में मेघ बरस जायें ,,,एक बार आओ तो झूम झूम गायें मन में उतर आओ तो ,,,मेरा यह मन भावन गीत तुम्हे मिलेंगें साँसों के संगीत की अभिनन्दन तुम्हे मिलेगें बरसेगा सावन झूम झूम के जब भाव में हम तुम मिलेगें प्रार्थना बनेगेंरे मन सब निरस है सरस है मुरली धुनचुपके से आकर इस दिलमें उतर जाते हो,सांसों में मेरी खुशबु बन के बिखर जाते हो। तुम बादल बूँदें धरती अम्बर,सब कुछ सावन तुम होतुम सा ही दिखता है सबकुछ,तुम सा हैधवल चांदनी में भी धुन है, तेरी ही रुनझुन गुनगुन है,बिछी हर सिंगार की चादर,तुम सी है मुरली की धुन या बहती थी किसलय पुरवाई देवालय से आती ध्वनियाँ,तुम सा हैहर एक दिन एक साल रहा, पतझर भी मधुमास रहा लगता है बसंत सा मौसम, तुम जैसामुक्त छंद थे,कवितायेँ थी,गीतों की भी मालाएं हैं तुम नजर आते हो रे मन सब धुनमयी नजर आती है

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किसी भी काम के लिए.. कोई भी.. निर्धारित उम्र नही होती है.. जब जागो तभी सवेरा है.. हर पल को जी भर के जी लो क्यूंकि.. जिंदगी ना मिलेगी दुबारा

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#पदमा_गाय - जिसका दूध बाल कृष्ण पिया करते थेपदमा गाय का बड़ा महत्व है पदमा गाय किसे कहते है पहले तो हम ये जानते है – एक लाख देशी गौ के दूध को १०,००० गौ को पिलाया जाता है,उन १० ,००० गौ के दूध को १०० गौ को पिलाया जाता है अब उन १०० गायों के दूध को १० गौ को पिलाया जाता है अब उन १० गौ का दूध काढकर १ गौ को पिलाया जाता है. और जिसे पिलाया जाता है, उस गौ के जो "बछड़ा" 'बछड़ी" होता है उसे "पदमा गाय"कहतेहै.ऐसी गौ का बछड़ा जहाँ जिस भूमि पर मूत्र त्याग करता है उसका इतना महत्व है कि यदि कोई बंध्या स्त्री उस जगह को सूँघ भी लेती है तो उसे निश्चित ही पुत्र की प्राप्ति हो जाती है.ऐसी एक लाख गाये नन्द भवन में महल में थी जिनका दूध नन्द बाबा यशोदा जी और बाल कृष्ण पिया करते थे, तभी नन्द बाबा और यशोदा के बाल सफ़ेद नहीं थे सभी चिकने और एकदम काले थे चेहरे पर एक भी झुर्री नहीं थी, शरीर अत्यंत पुष्ट थी.ऐसी गौ का दूध पीने से चेहरे कि चमक में कोई अंतर नहीं आता, आँखे कमजोर नहीं होती, कोई आधी-व्याधि नहीं आती.इसलिए नंद बाबा के लिए सभी कहते थे ‘साठा सो पाठा” अर्थात ६० वर्ष के नंद बाबा थे जब बाला कृष्ण का प्राकट्य हुआ था पर फिर भी जबान कि तरह दिखते थे. _____श्री राधा विजयते नमःजब गोपियों ने पदमा गौ के मूत्र से बाल कृष्ण का अभिषेक किया जब पूतना का मोक्ष भगवान ने किया उसके बाद पूर्णमासी, रोहिणी, यशोदा और अन्य गोपियाँ बाल कृष्ण की शुद्धि के लिए उन्हें पदमा गौ कि गौशाला में लेकर गई. रोहिणी जी पदमा गौ को कुजली करने लगी अर्थात प्यार से सहलाने लगी, यशोदा जी ने गौ शाला में ही गोद में बाल कृष्ण को लेकर बैठ गई और पूर्णमासी उस गौ की पूंछ से, भगवान के ही दिव्य नामो से झाडा (नजर उतारने) देने लगी. उसी पदमा गौ के मूत्र से बाल कृष्ण को स्नान कराया, गौ के चरणों से रज लेकर लाला के सारे अंगों में लगायी. और गौ माता से प्रार्थना करने लगी की हमारे लाल को बुरी नजर से बचानाजय श्री कृष्णा..

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जो हकीकत की मस्ती है उसमें प्रेम की बस्ती है वही मेरी हस्ती है जिसमें तेरी मधुशाला को मेरी प्यास तरसती है

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सहज सरल प्रफुल्लित रहकर , इस जीवन को जीना सीखो चेहरे पर मुस्कान सजाकर , अपने दर्द को पीना सीखो। दर्द तुम्हारा सुननेवाला साथ तुम्हारे महसूस हुआ तो जीवन सफल हैं

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प्रेम एक अद्वैत अनुभूति है... देह से परे और नेह से जुड़े,अभिन्न मन तन की परस्पर,ससम्मानीय सी स्वीकृति है...होता इसकी अभिव्यक्ति का न,कोई भी दिन कभी विशेष है ।न हीअपने प्रिय से प्रेम प्रकट ..करने का मोहताज़ सन्देश है।स्वार्थ की संकीर्णता से है मुक्त..प्रिय जन की शुभेच्छा से युक्त

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शिव शक्ति ही वो ऊर्जा है निज में जो शरीर के अवयव को जोड़ती है ,,जीवन है, साँस है यह आत्मबल है ,आस विश्वास है जल के कण कण में हवा नभ ,थल में बँधन है अणु ,परमाणु में साफ स्वच्छ विचार ,आहार में आचरण विचरण व्यवहार में शिव- शक्ति- विश्वात्मा है ,शिव-शक्ति-विश्वसृजक है,शिव-शक्ति- विश्वरूप हैं ,जिससे है जड़- चेतनशून्य ही हैवही शून्य है वही गणनाएँ शून्य ही आकाश हैं। जिसमें शिवशक्ति एहसास है पृथ्वी ग्रह-उपग्रह, चाँद-तारे, शिवशक्ति के ही पास हैं।। शिवशक्ति है महाविष्फोट प्रकृति का रचना हूआ जड़ चेतन सब तत्वों का अभ्यूदय हुआ,शून्य से जीवन शुरू है, शून्य पर ही अन्त है।शिव अज हैं अनादि हैं अनन्त हैं शिव राख लपेटे अघोरी सन्त हैं,शिव कल्याण हैं योग है वैराग्य है शिव शक्ति ही तम में ज्ञान रुपी प्रकाश हैंपूज्य परमेश्वर है।शाश्वत है, दिगम्बर है।शिव त्रिदेवों में पूजनीय महेश्वर है।शिव सत्य है, शक्ति उनकी पहचान हैं केशव आदि से ही शून्य का शिवशक्ति की महिमा अपार-अनन्त है।।शून्य के बिन साधना का भी अधूरा ज्ञान है।शिवशक्ति से ही तो हमारे स्वरूप की पहचान है।।

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